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सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला: खोया पाया बूथ मेले में बिछड़े लोगों को परिजनों से मिलाने में कर रहा भरपूर सहयोग 

  • अब तक एक दर्जन से ज्यादा बिछड़े लोगों को उनके परिजनों से मिला चुका है खोया पाया बूथ
  • सूरजकुंड मेला ग्राऊंड में बच्चे ले रहे हैं चांद – तारा की सवारी का लुत्फ़

चंडीगढ़ – हरियाणा के फरीदाबाद में चल रहे 37वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय  हस्त शिल्प मेला में में मुख्य चौपाल के पीछे गेट नंबर-1 की ओर स्थापित किया गया खोया पाया बूथ मेले में बिछड़े लोगों को अपनों से मिलाने में काफी मददगार साबित हो रहा है। यह भी इस मेले की एक ख़ास बात है।

खोया पाया बूथ की अनाउंसर मेले में अपने परिजनों से बिछड़े लोगों को मिलाने में जुटी हुई हैं। अगर कोई व्यक्ति सूरजकुंड मेले में घूमने के दौरान अपनों से बिछुड़ जाए तो वह इस अनाउंसमेंट बूथ पर आकर अपने परिजनों से मिलने की एनाउंसमेंट करवा सकता है। खोया पाया बूथ बिछड़े व्यक्ति की सहायता के लिए उसकी संबंधित जानकारी पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से तुरंत अनाउंस की जाती है और बिछड़े व्यक्ति या बच्चे को उसके परिजनों से मिलाया जाता है। यह बूथ अब तक करीब एक दर्जन से अधिक बिछड़े लोगों को अपनों से मिलवाने में सहायता कर चुका है।


दूसरी ओर, शिल्प मेला में बच्चों के लिए 20 प्रकार के मनमोहक झूले लगाए गए हैं। यह झूले बच्चों के लिए सजाए हैं रमेश राठी ने। झूलों में इस बार मनोरंजन के लिए मारुति सर्कस को भी शामिल किया गया है। मारूति सर्कस में कार सवार द्वारा हैरतअंगेज करतब दिखाए जाते हैं, जो बच्चों के साथ-साथ नौजवानों और बुज़ुर्गों को भी बहुत भा रहे हैं। मेला घूमने आए बच्चे गेट नम्बर एक के पास लगाए गए झूलों में मारूति सर्कस के अलावा सलमेवा, रेन्जर, ब्रेक डांस झूला, कोलम्बस झूला, ड्रेगन, जहाज, नैनो, छोटा कोलम्बस, ईलैक्ट्रिक कार, तीरा, छोटी ट्रेन, जहाज व चांद तारा की भी सवारी का लुत्फ़ उठा रहे हैं।


 
 
 
 

Online Dainik Bhaskar

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